MPAY का इतिहास


प्रकृति की वर्तमान प्रक्रियाएं


प्रकृति में हर चीज बड़े और छोटे चक्रों से गुजरती है, जो निरंतर एक ही क्रम में बार-बार आते हैं। उदाहरण के लिए, इन्हीं चक्रों में से एक हमारे चार मौसम हैं, जिनका मनुष्य जाति प्रत्यक्ष अनुभव करती है: वसंत, ग्रीष्म, पतझड़ और सर्दी। हर मौसम की अपनी एक ऊर्जा और कुछ विशेषताएं होती हैं। लेकिन इन छोटे चक्रों के अलावा, कहीं ज्यादा बड़े चक्र भी होते हैं। इन चक्रों को वैदिक शास्त्रों में चार "युगों" के रूप में वर्णित किया गया है। प्रत्येक युग की अवधि किसी मनुष्य के औसत जीवनकाल से लगभग हज़ार गुना ज्यादा बड़ी होती है। "वेद" का अर्थ है "ज्ञान"। यह संबंधों के सर्वव्यापक और कालातीत ज्ञान एवं प्रकृति के सिद्धांतों के बारे में बताता है। लगभग 5000 साल पहले इस ज्ञान को व्यास ऋषि द्वारा लिखा गया था, जिन्होंने वेदों की रचना की थी। उनका उद्देश्य ज्ञान को संरक्षित करके उसे वर्तमान युग से आगे बढ़ाना था। वर्तमान चक्र को कलियुग (अंधकार युग) के नाम से जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि कलियुग अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही खत्म होगा। यह सबसे भौतिकवादी और असामंजस्‍यपूर्ण युग है। यह युद्ध, अलगाव और संघर्ष दर्शाता है। जब तक यह रहेगा, मनुष्य जाति प्रकृति और प्रकृति के सिद्धांतों के साथ तालमेल में नहीं रह सकती है। स्वार्थ और भौतिकवादी हितों का पलड़ा हमेशा भारी रहता है। प्रकृति की असामंजस्‍यपूर्ण ऊर्जाओं में वृद्धि होती है। वर्तमान में, सभी लोग, साथ ही साथ, हमारी पृथ्वी भी, बहुत सारे परिवर्तनों से गुजर रही है। प्रकृति के दृष्टिकोण से, संसार और इसकी संतानें, कम आवृत्ति, कम ऊर्जा और साथ ही बेहद असामंजस्‍यपूर्ण युग, कलियुग, से सतयुग की ओर जा रहे हैं, जो उच्च ऊर्जा, उच्च आवृत्ति और बहुत सामंजस्‍यता वाला युग है। सतयुग (सत्य का युग) में लोग शांतिपूर्ण तरीके से एक साथ रहते हैं और अपने, प्रकृति और प्रकृति के सिद्धांतों के साथ तालमेल बनाये रखते हैं। हालाँकि, नए युग में पूरी तरह से जाने से पहले, लोगों को अपने आपको और पृथ्वी को सभी स्वार्थी उद्देश्यों से मुक्त करना पड़ता है और साथ ही सभी प्रकार की आंतरिक और बाहरी असामंजस्‍यपूर्ण ऊर्जाओं को भी दूर करना पड़ता है।


MPAY- मानव जाति का महान उपहार


इसकी गहराई में जाने से पहले और यह जानने के लिए कि MPAY का उपहार लोगों के लिए कितना महत्वपूर्ण है, इसकी पृष्ठभूमि के बारे में ज्यादा जानकारी पाना बहुत ज़रूरी है। 

 

प्रकृति में रहने वाली हर चीज में आत्मा होती है: पशु, पेड़-पौधे, मनुष्य, ग्रह, इत्यादि। प्रत्येक प्राणी का अवचेतन एक निश्चित आवृत्ति स्तर पर कंपन करता है। यह कांपनिक आवृत्ति वो वास्तविकता निर्धारित करती है जिसमें प्रत्येक प्राणी रहता है और जो यह बनाता है। चेतन मन का आवृत्ति स्तर जितना उच्च होता है, वो प्राणी अपने अंदर उतना ही निर्मल शर्तरहित प्रेम, प्रयोजन, सहज ज्ञान, निस्वार्थता, क्षमाशीलता, आंतरिक शांति और आनंद रखता है। उच्च आवृत्तियों का अर्थ है कि आप अपने सच्चे आह्वान और प्रकृति के नियमों के साथ सामंजस्यता में रहते हैं। जब आवृत्तियां बढ़ती हैं, आप उच्चतम स्रोत के समीप पहुँचते हैं। जब आवृत्तियां कम होती हैं, अवचेतन मन सशर्त प्रेम, स्वार्थी उद्देश्यों, भावनात्मक बोझ और पुरानी पीड़ा से घिर जाता है। मन के रूपांतरण और शुद्धिकरण की प्रक्रिया से गुजरकर आवृत्तियों को बढ़ाना संभव है, जिससे आवृत्तियों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाले सभी पक्षों को दूर किया जा सकता है।  

 

शरीर छोड़ने के बाद आत्मा आध्यात्मिक आयामों की ओर जाती है, और उस आयाम में जाकर शामिल होती है जो इसकी आत्मा की आवृत्ति से सबसे ज्यादा मिलती है। वहां की तरह धरती पर भी अलग-अलग आवृत्तियों के अलग-अलग स्तर होते हैं, आध्यात्मिक संसार के लिए भी यही लागू होता है। हालाँकि, जब तक प्रत्येक प्राणी धरती पर है, उच्चतम स्तर का शर्तरहित प्रेम, क्षमा, इत्यादि हासिल करने के लिए उसके पास अपनी आवृत्ति बदलने का अवसर होता है, चाहे उस समय पर उसके अवचेतन मन की जो भी स्थिति हो। इससे स्वर्गीय संसार में आत्मा की प्रतिष्ठा बेहतर होती है और इसका न केवल धरती पर हमारे द्वारा बनाये जाने वाले अनुभवों पर सीधा प्रभाव पड़ता है, बल्कि दूसरे आयाम में जाने के बाद, बनने वाले अनुभवों पर भी प्रभाव पड़ता है।

 

चूँकि, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड आत्माओं और जीवन से परिपूर्ण है, इसलिए, सांसारिक, साथ ही साथ, आकाशीय क्षेत्रों दोनों में, कुछ ऐसे प्राणियों का अस्तित्व होता है, जो पृथ्वी और मानव जाति की रक्षा के लिए विभिन्न आवृत्ति स्तरों पर काम करते हैं। परिवर्तनकाल के इस समय में यह स्थिति और अधिक हो गयी है। इसलिए प्रकाशीय आयामों द्वारा कई देवदूत, प्रधान देवदूत, उन्नत गुरु और कई दूसरे प्राणी बनाये गए हैं, जो रूपांतरण की प्रक्रिया में सहयोग दे रहे हैं। आने वाले वर्षों में, इन आयामों के साथ हमारा संपर्क बढ़ेगा और हम स्वाभाविक रूप से इन प्राणियों के साथ एक प्रकार का संचार विकसित कर लेंगे।

 

प्रकृति में एक प्राकृतिक क्रम होता है। जो प्राणी शर्तरहित प्रेम, क्षमा और निस्वार्थता जैसे अवचेतन मन के सबसे शक्तिशाली गुण प्राप्त कर लेते हैं, वो अस्तित्व के उच्चतम स्तरों पर काम करते हैं। उनकी आत्मा महान दयालुता, निर्मलता, करुणा, सद्भावना और शर्तरहित प्रेम से युक्त होती है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि किसी प्राणी का आवृत्ति स्तर जितना उच्च होता है, धरती और मानव जाति के लिए उनका आशीर्वाद भी उतना ही बड़ा और ज्यादा शक्तिशाली होता है।

उच्चतम प्रकाशीय स्तर पर संचालन करने वाले और मानव जाति के उत्थान के लिए उत्तरदायी प्राणी 19 सिद्ध है। "सिद्ध" का अर्थ है "उत्तमता"। ये प्राणी सभी धर्मों और रूढ़ियों से परे होते हैं, जिन्होंने अपने अवचेतन मन के उच्चतम स्तर को हासिल कर लिया है।

 

ये प्राणी पृथ्वी और इसके लोगों के बीच ऊर्जात्मक संतुलन बनाये रखने और सुरक्षित रखने के लिए दिन-रात काम करते हैं।

आवृत्ति के इस उच्चतम स्तर से, मनुष्य जाति को वर्तमान समय का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली उपहार और आशीर्वाद मिला, जो है MPAY। इसे आत्म-मुक्ति और आत्म-पूर्ति के मार्ग पर हमारा समर्थन करने के लिए नियुक्त किया गया है।


ताड़पत्र पुस्तकालय क्या हैं?


ताड़पत्र पुस्तकालयों की स्थापना लगभग 7000 साल पहले सप्त-ऋषियों द्वारा की गयी थी। «सप्त» का अर्थ है «सात»। ऋषि का अर्थ है «साधु», जो एक ऐसा मनुष्य होता है, जिसने किसी ईश्वरीय स्रोत से उच्चतम आध्यात्मिक और पूर्ण ज्ञान (हर समय मान्य रहने वाला ज्ञान) का उपहार प्राप्त कर लिया है और जो इस ज्ञान को सबसे निर्मल और शुद्ध तरीके से दूसरों को प्रदान करता है। सबसे प्राचीन वैदिक शास्त्रों में अगस्त्य ऋषि का उल्लेख किया गया है जो सप्त ऋषियों में से एक हैं। वह भारत में ताड़पत्र पुस्तकालय के संस्थापकों में से एक हैं। ताड़पत्र पुस्तकालय बहुत बड़े रहस्य हैं, जो आज की सांसारिक दुनिया के दृष्टिकोण से सर्वथा विपरीत हैं। यहाँ, हज़ारों साल पहले ही, आज के समय में रहने वाले करोड़ों लोगों की आत्मा की यात्राओं के अभिलेख ताड़ की पत्तियों पर लिखे जा चुके हैं। इसके अलावा, ताड़पत्र पुस्तकालय मानव जाति के वास्तविक उद्गम की स्मृति और संरक्षक हैं, जिसे ज्यादातर संसार में आज तक अपने झूठे स्वरुप में ही जाना जाता है। पूरे भारत में, कुल मिलाकर, बारह ताड़पत्र पुस्तकालय स्थित हैं।  ताड़पत्र पुस्तकालय दो प्रकार के हैं: नदी शास्त्र और जीव नदी। नदी शास्त्र वास्तविक पुस्तकालय के समान होता है। जानकारी ताड़पत्रों पर लिखी गयी होती है। कुछ शास्त्र 400 साल तक पुराने हैं और आज भी दूसरों के साथ साझा किये जाने की प्रतीक्षा में हैं। जीव नदी आध्यात्मिक संसार से सीधा संपर्क है। वहां, अगस्त्य जैसे, विभिन्न ऋषि स्वर्गीय संसार से विशेष रूप से चुने गए लोगों के लिए जानकारी संचारित करते हैं। परिस्थिति के आधार पर, उन संदेशों को नदी पाठक द्वारा प्राप्त किया जाता है या शब्द अपने आप ही ताड़पत्रों पर दिखाई देने लगते हैं। MPAY से संबंधित सभी संदेश और जानकारी ताड़पत्र पुस्तकालयों से आती है और आध्यात्मिक संसार एवं धरती की वर्तमान परिस्थितियों के साथ सद्भावना में संचारित की जाती है।


स्टेफनी बंक के बारे में


बाहरी यात्रा

मेरा जन्म 1982 में जर्मनी में उत्तरी राइन-वेस्टफेलिया के होक्सटर के एक छोटे से लकड़ी वाले घर में हुआ था। हाई स्कूल से ग्रेजुएट होने के बाद, मैंने कॉलेज में मनोविज्ञान का अध्ययन किया। अपना डिप्लोमा पाने के बाद, मैंने जर्मनी के अल्ल्गौ क्षेत्र में पारिवारिक और जीवन परामर्शदाता के रूप में चार साल तक कैरिटास के लिए काम किया। उस समय, योग शिक्षक बनने के लिए मैं पार्ट-टाइम पढ़ाई करती थी। पिछले दस सालों से, मैं बड़ों और बच्चों को व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से योग सीखा रही हूँ। www.online-yogaschule.de पर मेरा ऑनलाइन योग स्कूल देखें।2015 के दिसंबर महीने से, मैं जर्मनी के बर्नस्टीन में आयुर्वेद यूरोपीय अकादमी में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम कर रही हूँ। मैं उस टीम का हिस्सा रह चुकी हूँ, जिसने मेडिटेशन कोचिंग के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थापित किया था। इसके अलावा, मैं मनोविज्ञान और आयुर्वेद के क्षेत्रों में भी ज्यादा से ज्यादा लेक्चर दे रही हूँ। अकादमी में, आयुर्वेदिक मनोविज्ञान चिकित्सक बनने के लिए मैंने 3 साल का प्रोग्राम पूरा कर लिया है। मैं जल्द ही योग चिकित्सक बनने वाली हूँ और उसके अलावा मैंने आयुर्वेदिक चिकित्सा का अध्ययन भी शुरू कर दिया है। मैं लेखक और संगीतकार भी हूँ।समग्र दृष्टिकोण बनाने के लिए, मेरे जीवन के ये सभी अनुभव, योग, आयुर्वेद, ध्यान, मनोचिकित्सा, व्यक्तिगत विकास और उपचार के क्षेत्रों में मेरी सारी जानकारी मेरे काम में एक साथ प्रवाहित हो रहे हैं। मैं आपको जानने के लिए और अपने हृदय तक पहुँचने की आपकी पवित्र यात्रा में आपका सहयोग करने एवं आपको प्रोत्साहित करने के लिए तत्पर हूँ।  

 

आतंरिक यात्रा

2011 तक, मेरी ज़िन्दगी काफी सामान्य चल रही थी। मेरे पास एक अच्छी नौकरी थी और मैं एक मजबूत रिश्ते में थी। भले ही मेरी ज़िन्दगी बाहर से अच्छी लगती थी, फिर भी अपने दिल में मुझे इस बात का एहसास था कि कुछ ऐसा है जो मेरा इंतज़ार कर रहा है।इसके बाद, 2011 में, मेरे दिल ने अपने अंदर की पुकार सुनी, जिसे मैं अनदेखा नहीं कर सकती थी। उस समय मुझे पता था कि एक जीवन चक्र खत्म हो रहा था और मेरे लिए और मेरे सफर के लिए इस पुकार के पीछे जाना बहुत ज़रूरी था। मैंने सबकुछ छोड़ने का फैसला किया और अपना एक साल मैक्सिको में बिताया। वहां से, मेरे दिल की आवाज़ ने धीरे-धीरे मुझे अपने आने वाले भविष्य का रास्ता दिखाया। मैक्सिको में रहने के दौरान, मुझे कई माया और एज़्टेक परंपराएं सीखने का सौभाग्य मिला। वे नयी अंतर्दृष्टियां मेरे आने वाले सफर के लिए बहुत सार्थक साबित हुईं। हालाँकि, मुझे पूरी परिस्थिति और उन अनुभवों का असली प्रभाव तब जाकर समझ आया जब आगे चलकर मैंने भारत में समय बिताया।

2013 की जनवरी में, मैं थोड़े समय के लिए जर्मनी लौटी। लेकिन उसी साल मेरा सफर मुझे भारत ले गया, जहाँ मैंने अगले 5 महीने बिताएं। यहीं पर मेरे आध्यात्मिक गुरु अगस्त्य ऋषि और लुबमित्र मेरे जीवन का हिस्सा बने। मैक्सिको में मैंने जिस आंतरिक मार्गदर्शक का अनुभव किया था वो मेरी कल्पना नहीं थी, बल्कि एक सच्चाई थी, और अब उसका एक नाम भी था। 2013 के अक्टूबर महीने से मेरी आध्यात्मिक यात्रा भारत के ताड़पत्र पुस्तकालय से निर्देशित हो रही है।  

2014 की जनवरी में, मैं भारत से वापस आ गयी और 2014 की मई में मैंने लेक कॉन्सडैंस के मार्कडोर्फ में योग और सिद्ध केंद्र खोला। उसी साल, मुझे दूसरों के लिए MPAY का प्रारंभ करने की क्षमता पाने का सौभाग्य भी मिला।  

11/19/2019 को मैं 2.5 महीने के लिए यूरोप की एक लंबी यात्रा पर गयी। उन 2.5 महीनों में, मैंने 13 देशों की यात्रा की। 2020 की जनवरी के अंत में, मैं अपनी यात्रा से वापस लौट आयी। इस सार्थक समय के दौरान, मुझे बहुत सारे अद्भुत अनुभव करने का मौका मिला जिन्होंने मुझे अंदर तक विचलित कर दिया, और इसने मुझे अपने अनुभवों को लोगों के साथ बांटने के लिए एक दूसरी किताब लिखने के लिए प्रेरित किया। यह बस मेरे वर्तमान प्रयासों में से एक है। वर्तमान में, मैं सामंजस्यता के साथ और अपने आध्यात्मिक संतुलन की मदद से यह किताब लिख रही हूँ।

 

लेखक: Stephanie Bunk (2020)